इस बार के ‘वैलेंटाइन-डे’ ने किस्म-किस्म की खबरों से मिलवाया। संयोग से मेरा जन्मदिन भी 14 फरवरी को पड़ता है। काफी वर्षों तक तो जन्मदिन आया गया हो जाता था। हमारे उस दौर में जन्मदिन मनाने का उतना चलन भी नहीं था, जितना इन दिनों है। अब तो प्रेमी वैलेंटाइन वीक मनाते हैं। पूरे हफ्ते भर मौज मस्ती। वैसे भी यदि जीवन में खुशी और आनंद नहीं तो उसके कोई मायने नहीं। कुछ लोगों की शिकायत है कि सच्चा प्रेम धीरे-धीरे गायब हो रहा है। अधिकांश पति-पत्नी के रिश्तों में भी हैरतअंगेज ठंडापन घर करता जा रहा है। आपसी समझदारी और वफा की जगह बेवफाई बढ़-चढ़कर अपनी रंगत दिखा रही है। प्यार पर मिलावट ही मिलावट और बाजारीकरण का कब्जा है, लेकिन प्रेम और सच्चे समर्पण को लेकर मेरी धारणा दूसरों से अलग है। अपवाद हमेशा रहे हैं। कहीं वफा की प्रेरक दास्तानें तो कहीं बेवफाई की दुकानें हैं, जहां प्रेम की बोली लगती है। रिश्तों को रौंद दिया जाता है। प्रेम केवल एक दिन या एक हफ्ता मनाने का पर्व नहीं। दिल से दिल के इस रिश्ते में से पवित्रता, त्याग, सहनशीलता के साथ समर्पण और सहयोग को यदि गायब कर दें तो कुछ भी नहीं बचता। सच्चे प्रेम की यात्रा तो मृत्यु के बाद भी जारी रहती है। मरकर भी प्यार को जिंदा रखने वाले जॉन ने तो वाकई मन को गदगद और तरोताजा कर दिया...।
सात समंदर पार कैलिफोर्निया की डायना खुद को दुनिया की खुशकिस्मत महिलाओं में से एक मानती है। उसके पति जब जीवित थे तब उसे हर वैलेंटाइन-डे पर ताजे सफेद फूलों के गुलदस्ते के साथ एक कार्ड उपहार में देते थे। कार्ड पर यही मैसेज रहता था, ‘‘मेरे पास सिर्फ एक दिल है और वो तुम्हारा है। तुम हमेशा मेरी वैलेंटाइन रहोगी। आई लव यू डायना।’’ हमेशा खुश रहने वाले जॉन ने इस दस्तूर को 46 वर्ष तक ऐसे निभाया जैसे डायना उसकी पत्नी नहीं, प्रेयसी हो। दुर्योग से 2017 में गंभीर बीमारी के कारण जॉन की मृत्यु हो गई। 2018 में डायना को ऐन वैलेंटाइन-डे पर जॉन का भेजा सफेद फूलों का गुलदस्ता और कार्ड मिला तो वह हतप्रभ रह गई। क्या उसके प्रियतम ने स्वर्ग से उसे उपहार भेजा है? काफी देर तक वह इसी सवाल में उलझी रही। उसके बाद भी जब पांच साल तक ये सिलसिला बना रहा तो डायना ने खोजबीन की तो पता चला कि जॉन को अपनी मृत्यु का काफी पहले आभास हो गया था। उसी दौरान उसने फूलों का गुलदस्ता बनाकर बेचने वाले स्थानीय दुकानदार को एक मुश्त ढेर सारी रकम देते हुए निर्देश दिया था कि मेरी मौत के बाद भी मेरी पत्नी को ताउम्र हर साल वैलेंटाइन सरप्राइज गिफ्ट देते रहना। जॉन को इस दुनिया से रुखसत हुए नौ वर्ष बीत चुके हैं। हर 14 फरवरी के दिन वही सफेद फूलों का गुलदस्ता, वही कार्ड और मैसेज डायना के पास आता है, तो उसकी आंखें नम हो जाती हैं। उसे यही लगता है उसका प्रियतम अभी भी उसके आसपास है।
‘‘97 साल के बुजुर्ग ने अपनी 50 साल पुरानी साथी से शादी करने की ठानी’’ इस शीर्षक के अंतर्गत छपी खबर का लब्बोलुआब कुछ ऐसा है कि सिंगापुर में रह रहे एक बुजुर्ग की पत्नी वर्ष 2014 में इस दुनिया से चल बसी। पत्नी के गुजरने के बाद बुजुर्ग को अकेलापन काटने लगा। उन्हें ऐसी साथी की जरूरत महसूस होने लगी, जो सरल, सहज और उनके दिल के करीब हो। ऐसे में उन्हें उस महिला की याद हो आई, जिन्हें वे बीते पचास सालों से जानते-पहचानते थे। वह भी अब अकेली थी। उन्होंने उससे संपर्क साधा तो वह भी हमेशा-हमेशा के लिए उनके साथ रहने को राजी हो गई। बेटों ने अपने उम्रदराज पिता के फिर से शादी करने के निर्णय के खिलाफ शोर-शराबा करना प्रारंभ कर दिया। उनका कहना था कि इस उम्र में शादी करना अपना तथा परिवार का म़जाक उड़वाने जैसा है। ‘लोग क्या कहेंगे’ की सोच ने उन्हें इतना बेचैन कर दिया कि वे अदालत की शरण में जा पहुंचे। बेटों ने पिता को मानसिक रूप से कमजोर सिद्ध करने के लिए कई कारण गिनाये। उन्हें भुलक्कड़ और शारीरिक रोगों का शिकार बताते हुए अस्पताल में भर्ती कराने की इच्छा जतायी, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को कोई महत्व नहीं दिया और याचिका खारिज कर दी। महत्वाकांक्षी चुस्त-दुरुस्त बुजुर्ग 1960 के दशक में शुरू की गई एक केमिकल कंपनी के मालिक हैं, जिससे बेतहाशा कमायी हो रही है। दरअसल, उन्होेंने जैसे ही अपनी वसीयत में बदलाव किए तो स्वार्थी बेटों का माथा ठनका कि हो न हो, यह परिवर्तन नये रिश्ते के दिमाग की उपज है। अब तो बुजुर्ग और महिला शीघ्र ही विवाह के बंधन में बंधने जा रहे हैं।
वैलेंटाइन के दिन भोपाल की एक महिला अफसर के द्वारा खुद से 12 साल छोटे प्रेमी को डेढ़ करोड़ में खरीदने की फिल्मी-सी खबर को पढ़कर मैं कुछ पल तक हक्का-बक्का रह गया, लेकिन फिर अच्छा लगा। किसी भी रिश्ते को जबरन तो नहीं खींचा और स्वीकारा जा सकता। इस खबर की नायिका यानी प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष तो प्रेमी 42 वर्ष का है। दोनों कैसे एक दूसरे के करीब आए और जिस्मानी रिश्ते बनाए यह रहस्य अपनी जगह है। अपने से बड़ी रईस औरत का प्रेमी 16 और 12 साल की दो बेटियों का पिता भी है। जब इस नाजायज रिश्ते की वजह से प्रेमी के घर में कलह-क्लेश के कर्कश ढोल-नगाड़े बजने लगे और लोग तरह-तरह की बातें करने लगे तो बदनामी और मानसिक पीड़ा से जूझ रही बड़ी बेटी से रहा नहीं गया तो वह कोर्ट जा पहुंची। हिम्मत और हौसले की डोर से बंधी बेटी को उम्मीद थी कि पिता को ईश्वर सद्बुद्धि देंगे। वे फिर से मां के पास लौट आएंगे, लेकिन काउंसलिंग सत्र के दौरान पिता तो अपनी जिद पर अड़े रहे कि उन्हें जो खुशी-संतुष्टि प्रेमिका के साथ मिलती है, पत्नी के साथ रहने में तो बिल्कुल नहीं मिलती। अब हम दोनों में बेइंतहा दूरियां बढ़ गई हैं। दोबारा करीब आना असंभव है। अब तो प्रेमिका ही मेरे लिए सबकुछ है, जिसकी निकटता मुझे मानसिक शांति से सराबोर कर देती है। पति के इस निर्णय से पत्नी को आघात तो लगा, लेकिन फिर भी उसने खुद को संभालते हुए कहा कि, यह तो घोर अन्याय है। उसकी दोनों बेटियों का भविष्य ही अंधकारमय हो जाएगा। अपने जीते जी वह उनका अहित होते नहीं देख सकती। यदि आपको अपनी जिद से टस से मस नहीं होना है, तो मेरी मांग को ध्यान से सुनें और पूरा करें। मेरी बेटियों के गुजर-बसर के लिए एक शानदार डुप्लेक्स और 27 लाख रुपए नकद दिए जाएं। पत्नी की मांग को सुनकर पति तो चुपचाप सिर झुकाये खड़ा रहा, लेकिन उसकी प्रेमिका ने सारी शर्तें मानते हुए बहुत धैर्य के साथ कहा वह अपने प्रेमी के परिवार को बेसहारा, आर्थिक संकट से जूझते नहीं देखना चाहती। इसलिए मैं अपनी सारी जमा-पूंजी सहर्ष उन्हें देने को तैयार हूं। पत्नी ने लगभग डेढ़ करोड़ की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को अपनी सौतन के हवाले कर दिया है, ‘‘जाओ, अब तुम्हें कोई नहीं रोके-टोकेगा। तुम अपने मन की करने के लिए हर तरह से आजाद हो।’’
सच्चे प्रेम और आत्मिक समर्पण के लिए अमित को मेरा बारंबार झुक-झुककर सलाम। पुणे के निवासी अमित की पत्नी श्रेष्ठा को कैंसर हो जाने पर कोल्हापुर के एक कैंसर सेंटर में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। कीमोथेरेपी के दौरान श्रेष्ठा के देखते ही देखते काले घने बाल झड़ गये। अमित ने जब अपनी प्रिय पत्नी की यह हालत देखी तो वह बहुत उदास होकर सोचने लगा कि ऐसे में श्रेष्ठा पर क्या बीत रही होगी? शादी के समय सात फेरे लेते वक्त उसने श्रेष्ठा से यह वादा भी किया था कि हर जंग हम दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे। वह तुरंत सैलून पहुंचा और अपना सिर मुड़वा लिया। अमित ने श्रेष्ठा और अपनी गंजी तस्वीर फेसबुक पर डालते हुए लिखा, ‘‘बाल तो उग आएंगे, लेकिन प्यार का साथ अमर है...। श्रेष्ठा हम योद्धा हैं। जन्म-जन्मांतर तक साथ मिलकर लड़ेंगे।’’
बीते 14 फरवरी के दिन ही मेरी मित्र रेवती ने अनुराग से तलाक लिया था। इस बार के वैलेंटाइन-डे पर उसने अरबपति सुखसागर खन्ना से शादी कर ली। मजे की बात यह रही कि रेवती और सुखसागर के ब्याह के अवसर पर अनुराग भी उपस्थित था। सभी झूम-झूमकर नाचे। रिश्ते के टूटने को उत्सव की तरह मनाने के लिए रेवती ने जो ‘डिवोर्स रिंग’ पहनी उसे उसी हीरे की अंगूठी को तोड़कर बनाया गया था, जो कभी अनुराग ने उसे सगाई के अवसर पर पहनाई थी। उसे ही ‘डिवोर्स रिंग’ नाम दिया गया। रेवती आकाशवाणी में ऊंचे पद पर है। अनुराग भी देश के नामी-गिरामी लेखक हैं। सुखसागर दिल्ली के बड़े उद्योगपति हैं।
