‘‘वो 11 जून की रात थी। पति भी साथ थे। मैं शौचालय गई थी। तभी धड़धड़ाते हुए पांच गुंडे वहां आ पहुंचे। मेरे पति को बाहर से बंद कर उन्होंने मुझे कसकर दबोच लिया। मैं हतप्रभ थी। यह क्या हो रहा है? मुझे अंधेरे में खींचकर ले जाया गया। मेरी साड़ी खोली और मुंह बंद कर दिया। एक ने मेरे ब्लाउज को तार-तार कर मेरे हाथ बांध दिए। इस दौरान मैं पति को आवाज लगाती रही। आसपास का कोई तो सुन ले इसी उम्मीद में छोड़ देने की फरियाद के साथ चीखती-चिल्लाती रही। मेरा मुंह बंद करने के लिए उन बदमाशों ने शरीर पर ब्लेड से चीरफाड़ और अंधाधुंध मारपीट जारी रखी। मेरी छाती और जांघ खून से लथपथ होती रही और मैं बेहोश हो गई। पांचों ने बारी-बारी से मुझ पर बलात्कार किया और मुंह न खोलने की धमकी देकर बड़े आराम से चलते बने। दरवाजा बंद होने के कारण मेरे पति अभी तक अंदर थे। मैंने अपनी देवरानी को फोन किया तो उसके आने के बाद पति को बाहर निकाला गया। मेरी शारीरिक दुर्दशा देखकर उनकी तो जान ही निकल गई। वह दहाड़-दहाड़ कर रोते रहे। तब तक कुछ लोग भी वहां पर आ गये थे। मेरे दु:ख से अवगत होनेे से ज्यादा उन पर वीडियो बनाने की धुन सवार थी। मैं एक कदम भी चलने में असमर्थ थी। किसी तरह से मुझे सदर अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान मेरे गुप्तांग से बंदूक की गोली, पत्थर, लकड़ी और कंकड़ निकाले गए जिन्हें दुष्कर्म के दौरान मेरे गुप्तांग में डाला गया था।’’ डॉक्टर और खाकी वर्दी वाले भी महिला के साथ हुई इस घोर अक्षम्य दरिंदगी को लेकर चिंतित और अत्यंत परेशान हैं। नारी पर इतना जुल्म तो अकल्पनीय है, लेकिन जो मंजर सामने हैं वो तो सोचने-समझने वाले इंसानों को चिंता और सवालों के घने जंगल में छोड़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के एक शहर में तुलसी के गमले के पास रील बनाने को लेकर पहले तो विवाद हुआ फिर जंग छिड़ गई। एक परिवार के बच्चे पड़ोसी के घर के बाहर रखे पवित्र तुलसी के पौधे के गमले के पास रील बना रहे थे। इसी दौरान गमले को हल्का धक्का लग गया। यह कोई बहुत बड़ी घटना नहीं थी, लेकिन कुछ लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए उत्तेजक अफवाहें फैला दीं। उसके बाद देखते ही देखते आपसी विवाद कुछ ऐसा बढ़ा कि एक-दूसरे के बीच मारपीट शुरू हो गई। दो महिलाओं के सिर पर अंधाधुंध वार किये जाने से हरे-भरे गमले के आसपास की जमीन लाल हो गई और पूरी कॉलोनी में जबरदस्त तनाव का माहौल बन गया। कुछ अति उत्साही लोगों ने बीच-बचाव करने की बजाय वीडियो बनाना जरूरी समझा। उनके बनाये वीडियो के वायरल होने के पश्चात गली-मोहल्ले के विवाद ने पूरे शहर को अपने लपेटे में लेते-लेते अत्यंत उग्र रूप धारण कर लिया। पुलिस ने बेकाबू होती स्थिति को नियंत्रित कर संभाल लिया। विघ्न संतोषी तो पूरे शहर में आग लगाकर अपने हाथ सेंकने की तैयारी में थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर उकसाऊ आधी-अधूरी जानकारी तेजी से फैलने के कारण लोगों में जो तनाव फैलता है वही उन्हें अराजक और हिंसक भी बनाता है। वैसे भी आज के दौर में अधिकांश लोग मानसिक अशांति की गिरफ्त में हैं। नारंगी शहर नागपुर में एक चिकित्सक अस्पताल में मृत पाये गए। कुछ दिनों से पारिवारिक कलह की वजह से मानसिक तनाव से गुजर रहे डॉक्टर साहब ने स्वयं को अत्याधिक मात्रा में एनेस्थीसिया दवा का इंजेक्शन लगा कर मौत के हवाले कर दिया। जिन पर दूसरों को बचाने की जिम्मेदारी है उनकी गैर जिम्मेदारी पर क्या कहें? राजधानी दिल्ली के पचास वर्षीय डॉक्टर मनीष गुप्ता ने अपने घर में काम करने वाली औरत को क्रिकेट बैट और चाकू से अंधाधुंध धुनाई कर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस को जब खबर लगी तो वह फौरन उसके घर पहुंची। वह सिर पर हाथ धरे साढ़ियों पर बैठा मिला। खून से सना बैट और चाकू उसकी दरिंदगी की गवाही दे रहे थे। उसने बिना कोई विरोध किये कहा, ‘‘मुझे फांसी दे दो।’’ अपनी नौकरानी की नृशंस हत्या की उसने जो वजह बतायी वह भी बेहद चौंकाने वाली है। उसका कहना था कि, वह जादूगर थी, काला जादू करती थी। उसके घर में पैर रखते ही नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता था। इससे मेरे बेटे की पढ़ाई भी बाधित होती थी।
कुछ महीने पूर्व इस अंधविश्वासी डॉक्टर ने नौकरानी को मोबाइल पर किसी से जादू टोने की बात करते सुना था। वह पंद्रह साल से डॉक्टर के यहां काम कर रही थी। डॉक्टर की मेडिकल हिस्ट्री से पता चला है कि वह तनावग्रस्त रहता था, उसे खुखरी रखने का भी शौक था। इस बात को लेकर भी वह गुस्से में रहता था कि नौकरानी उसकी पत्नी की ज्यादा सुनती थी और उसकी अवहेलना करती थी। डिप्रेशन में गुजर रहे त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनीष गुप्ता को यकीन हो चला था कि घर में चल रही अशांति की वजह भी यही नौकरानी ही है। मनीष की पत्नी भी डॉक्टर है। उनका इकलौता बेटा भी मानसिक रूप से कमजोर है।
छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में स्थित थाने में एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसका पति चौबीस घंटे उसके चरित्र पर शक करता है। मैं किसी से बात करूं तो पूछा-पाछी करते हुए तरह-तरह के लांछन लगाने लगता है। फल-फू्रट और सब्जी के ठेले वाले से ज्यादा देर तक बात करूं तो उसका पारा चढ़ जाता है। जान-पहचान वाले से भी यदि हंस कर बोलती हूं तो पिटायी करने पर उतर आता है। कुछ दिन पहले तो वह संदेह की आग में ऐसा झुलसा कि मेरे सिर के बाल काट कर मुंडन कर दिया। इतने में जब उसका मन नहीं माना तो मेरे पूरे जिस्म पर इंजन ऑयल और कालिख पोत दी। इससे उसे खुशी और संतुष्टि मिली लेकिन मेरा तो मानसिक संतुलन ही बिगड़ गया। मैं ही जानती हूं कि मुझे पल-पल कैसी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। कू्ररता की तमाम हदें पार कर देने वाले इस हिंसक पति ने अपनी नीचता को प्रदर्शित करने वाला वीडियो भी बनाया, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल कर अपनी मर्दांनगी का गुणगान किया।
हिंसा, शंका, बलात्कार, जादूटोना और खून-खराबा। यह वो शब्द हैं जो सभ्य और संस्कारी लोगों की जुबान और आचरण में शोभा नहीं देते। लेकिन जब कुछ लोगों के दिल-दिमाग में यह दाग-धब्बे गहरे तक रच-बस चुके हों तो उनका इलाज होना भी जरूरी है। इस अजब-गजब काल में खुदकुशी के वीडियो और रील्स बन रही हैं और खूब वायरल हो रही हैं। फूहड़ कॉमेडी को सराहा जा रहा है। संगीन अपराधी अपराधबोध से ग्रस्त हो शर्मिंदा होने की बजाय वीडियो और रील्स बनाकर अपने कुकर्मों के यशोगान में लगे हैं! माना कि आज लाखों लोगों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया सरल और सहज माध्यम है। इस आधुनिक मंच पर मिलने वाले लाइक्स, व्यूज और फॉलोअर्स की मायावी भीड़ बैठे-बिठाए छाती को चौड़ा कर देती है। यह भी सच है कि सोशल मीडिया पर सार्थक जानकारियां पहुंचाने वालों को तारीफों के गुलदस्ते मिलना प्रेरणा के दीप जलाता है। लेकिन यहीं पर नकारात्मकता, बेहूदगी, अस्थिरता और क्रूरता जैसे शर्मनाक प्रवृत्तियों के ढोल पीटने वालों की पीठ भी थपथपायी जा रही है। अपने धर्म और समुदाय को महान और दूसरे को नीचा दर्शाने वाले धूर्त खलनायक खुद को ‘नायक’ मानने लगे हैं। मनोरंजन के नाम पर धार्मिक उन्माद फैलाया जा रहा है। कुछ लुच्चे- टुच्चे लस्त-पस्त भोगी पत्रकार और वरिष्ठ सफेदपोश संपादक जनाधार विहीन विपक्षी नेताओं तथा विरोधी दलों के लिफाफों पर ही जिन्दा हैं। राजनेताओं, मंत्रियों और महिलाओं पर अभद्रतम टिप्पणियां करने वाले शैतान कामेडियन और कलमकार जब भारत के निष्कलंक कर्मवीर प्रधानमंत्री के बारे में ओछी और अनर्गल बातें बोलते और लिखते है तो देशप्रेमियों का खून खौल जाता है। असहाय औरतों के बलात्कारी गैंगरेप के वीडियो सोशल मीडिया पर डालने से पहले अपनी मां, बहनों, बहू, बेटियों के बारे में विचार क्यों नहीं करते? याद रहे कि जैसे को तैसा मिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। चरित्र और नैतिकता विहीन लोगों की अंधी भीड़ में जब अच्छे-भले चेहरे शामिल हो जाएं तो दु:ख और शर्मिंदगी के साथ-साथ गुस्सा भी आता है। इसलिए बहुत सोच-समझकर लाइक्स और साझा करने की दौड़ में शामिल हुआ जाए...तो इसी में सभी की आन-बान और शान बनी रहने वाली है...
