मायानगरी मुंबई में रेतीले समंदर के निकट एक व्यक्ति ने अनोखा कारोबार प्रारंभ किया है। वह लोगों की समस्याओं का समाधान करने का दावा करता है। लोगों को भी उस पर भरोसा है। तभी तो खिंचे चले आते हैं। इसके लिए उसने बाकायदा एक बोर्ड लगा रखा है, जिसमें विभिन्न इंसानी तकलीफों, जरूरतों और मुश्किलों के शाब्दिक और भावनात्मक समाधान की कीमत लिखी हुई है। साधारण परेशानी सुनने के लिए मात्र ढाई सौ, बड़े संकट को जानने के लिए पांच सौ तो साथ मिल-बैठकर सुनने-सुनाने तथा रोने-गाने के लिए वह एक हजार रुपए की दक्षिणा लेता है। उसके पास कई स्त्री-पुरुष अपना दुखड़ा सुनाने के लिए आते हैं। वह डिप्रेशन, प्यार में धोखा खाये, जुए-सट्टे में बर्बाद हुए निराश, हताश और अकेलेपन के शिकार लोगों की खासतौर पर मदद करने का दावा करता है। भावनात्मक रूप से टूट चुके लोगों के साथ-साथ नौकरी, कामधंधे की तलाश में भटकते लोगों की परेशानी को वह बहुत ध्यान से सुनता है और सफल होने का रास्ता भी बताता है। वह बड़े इत्मीनान से सभी की सुनता है। कोई जल्दीबाजी और पाने-छुपाने की भावना उसमें नज़र नहीं आती। गरीबों के साथ-साथ अमीर भी उसके आकर्षण से बच नहीं पाते। माथे पर टीका लगाकर बैठे इस शख्स के विभिन्न वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इस अनोखे ज्ञानवान के वीडियो पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं। बहुतों ने लिखा है कि लोगों के पास समस्याएं बहुत हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। इसलिए यह धंधा कभी मंदा नहीं पड़ेगा। गरीबों के लिए तो ठीक है, लेकिन रईसों के लिए उसे रेट और ऊंचे रखने चाहिए, क्योंकि उन्हें दिन-रात अथाह जोड़-तोड़, चिंता, परेशानी और दगाबाजी से जूझना, टूटना पड़ रहा है।
यह कोई नया खेल-करिश्मा नहीं। भारत में सदियों से ऐसे दिमाग वाले अपना चमत्कार दिखाते चले आ रहे हैं। कभी फकीर, कभी साधु, कभी ज्योतिषी, चोर तो कभी सिपाही और पता नहीं क्या-क्या बनकर ठगने और लूटने का गोरखधंधा भी चलता चला आ रहा है। आसाराम, राम-रहीम जैसे अनेकों धूर्त और मक्कार पकड़ में तो आते हैं, लेकिन फिर भी लोगों के दिमाग के दरवाजे खुल नहीं पाते। यदि ऐसा नहीं होता तो जेलों में सड़ रहे शैतान बाबाओं की तर्ज पर नये कपटियों का पैर जमाना संभव ही नहीं हो पाता। धर्म-कर्म और ज्योतिष के उपजाऊ बाजार में अशोक खरात के नाम के नये कपटी की गूंज की खबरों ने हर किसी को चौकाया। पुलिस के शिकंजे में फड़फड़ाते इस कपटी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि दूसरों की हस्त रेखाएं देखते-देखते उसके इतने बुरे दिन आ धमकेंगे कि मुंह छिपाना पड़ जाएगा। लेकिन पाप का घड़ा जब भरता है तो कोई कहां बच पाता है। स्वयं को महान भविष्यवक्ता चमत्कारी-बाबा बताकर असंख्य लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाले अशोक खरात उर्फ कैप्टन ने तो अपने चमत्कारों की फर्जी कहानियां प्रचारित करने के लिए ग्रंथनुमा किताबें तक प्रकाशित कर लाखों की तादाद में पूरे महाराष्ट्र में बंटवा दी थीं। इन किताबों के लेखक नामकरण आवारेे का कहना है कि उसे जो बताया गया उसने वही लिखा। उसे तो बस अपनी मोटी फीस से मतलब था। वर्ष 2012 में उससे पहली किताब लिखवायी गई। इस आकर्षक किताब में ‘सिद्ध पुरुष के सानिध्य में’ शीर्षक के तहत खरात की कथित सिद्ध शक्तियों के अनेकों उदाहरण देते हुए उसे दिव्य पुरुष घोषित किया गया। इसके प्रकाशन और मुफ्त वितरण के पश्चात कई नये-नये लोगों को पता चला कि देश की धरती पर एक महान ‘दिव्य पुरुष’ का जन्म हो चुका है। जिसके चरणों में नतमस्तक होने पर हर कष्ट का अंत होना संभव है। आजकल गरीबों से ज्यादा अमीरों को अपना भविष्य जानने की चाहत तड़पाती है। नेताओं और अफसरों को ऐसे ज्ञानियों की तलाश रहती है। खरात ने ऐसे लोगों तक खास तौर पर अपनी पहुंच बनाई और फिर उसकी लाटरी ही खुलती चली गई। देखते ही देखते अंधभक्तों के तेजी से बढ़ते चले जाने से खरात कीं छाती तो चौड़ी होनी ही थी। एक समय ऐसा भी आया जब उसके तिलस्मी दरबार में केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, आईएएस अफसर तथा उद्योगपति भी अपना भविष्य जानने और सुधारने की लालसा के साथ पहुंचने लगे। वह विधायकों, सांसदों को उनके मंत्री बनने के दिन तक की घोषणा करने के साथ-साथ कुर्सी पाने के उपाय बताने लगा। कभी-कभी तुक्का भी चल जाता है। इस मामले में खरात खुशकिस्मत रहा और धन की अंधाधुंध बरसात होने लगी। कुछ ही वर्षों में उसने लगभग 1500 करोड़ की संपत्ति जुटा ली। सत्ता, प्रशासन और उद्योग जगत के नामी-गिरामी चेहरों की देखादेखी आम लोगों की भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया। हैरत और मजे से लबालब हकीकत यह भी रही कि नेताओं, अधिकारियों, उद्योगपतियों तथा किस्म-किस्म के रईसों की माताएं, बहनें और पत्नियों के साथ-साथ अनेकों पुलिस वाले भी उसकी चौखट पर अपनी बारी आने के इंतजार में खड़े देखे जाने लगे। अपनी तरक्की के अलावा फलाना केस कब और कैसे सुलझेगा, छिपा और भागा हुआ बलात्कारी, हत्यारा, चोर-लुटेरा, भ्रष्टाचारी कैसे पकड़ में आयेगा यह जानने के लिए खाकी वर्दी, सफेद खादी के साथ सिर झुकाये जब नज़र आने लगी तो खरात ने खुद को धरती का सर्वशक्तिमान... भगवान समझ लिया। ऊंचे लोगों को अपने जाल में फंसा कर नाम के साथ दाम कमाते धूर्त ने ऊंचे घरानों की बहू-बेटियों को भी अपने मायावी जाल में फंसाते हुए वासना का नंगा नाच प्रारंभ कर दिया। शैतान, बलात्कारी की धूर्तता और दुष्टता शायद ही इतनी शीघ्र उजागर हो पाती यदि दुष्कर्म की शिकार एक महिला पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज न करवाती। उसकी साहसी पहल के पश्चात अपनी अस्मत लुटवा चुकी और भी कई महिलाएं शिकायतों के पुलिंदे के साथ थाने पहुंचने लगीं, तो धमाके पर धमाका और निर्लज्ज देहभोगी बेनकाब होता चला गया। धर्म अंधभक्ति और आस्था के बाजार के इस शातिर खिलाड़ी ने कुछ ऐसा जादू चलाया, जिसके चलते महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर इसके पैर धोने के साथ-साथ वो सब भी कर गुजरीं, जो अत्यंत शर्मनाक है। जब ऐसे खास चेहरे अंधी वासना का खिलौना बनते हैं तो दूसरों की झिझक भी जाती रहती है। अपनी महिला भक्तों के भरोसे का कत्ल या रजामंदी से उसने कितनी महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाया इसका संपूर्ण आंकड़ा तो सामने आना संभव नहीं। लुटी-पिटी सभी नारियां मुंह खोलने का साहस नहीं दिखातीं। जो पहली पीड़िता सामने आयी उसने बताया कि अपने परिवार के बिगड़ते हालात की वजह से वह भविष्य के बारे में जानने के लिए उसके पास पहुंची थी। उसे उम्मीद थी तकलीफों से छुटकारा पाने का कोई सार्थक उपाय बाबा के दरबार में अवश्य मिलेगा। एक दिन खरात ने उसे अपने करीब बिठाकर पानी पिलाया, जिसे पीते ही वह बेहोश हो गई। होश में आने पर पता चला कि उसकी आबरू पर डाका डाला जा चुका है। इस दौरान उसकी तस्वीरें भी उतार ली गई थीं। इसके बाद तो देहभोगी ने ब्लैकमेलिंग करने का ऐसा सिलसिला चलाया कि वह बार-बार यौन शोषण का शिकार होने को विवश होती रही। महाराष्ट्र के नाशिक का यह हाई-प्रोफाइल अय्याश शैतान, आस्थावान नारियों को अपने बस में करने के लिए जो पानी पिलाता, उसमें वासना को भड़काने के लिए वियाग्रा सहित कई नशीली दवाएं मिलाता था। जब भक्तिन पर नशे का तीव्र असर हो जाता था तब वह ‘भगवान से दिव्य मिलन’ के नाम पर अपनी देह की भूख शांत करता था। पुलिस के शिकंजे में बुरी तरह फंसने के बाद उसने निर्लज्जता से खुद को सही ठहराते हुए कहा कि, मैंने किसी महिला के साथ गलत नहीं किया। मैंने जो भी किया वो तो धार्मिक अनुष्ठान का एक हिस्सा था। ये शातिर दुराचारी भले ही खुद ज्यादा शिक्षित नहीं है, लेकिन फिर भी उच्च शिक्षित औरतों को लुभावने शब्दजाल में आसानी से फांस लेता था। वह उनकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहता था कि, तुम तो अपने पति की तुलना में बेइंतहा आकर्षक और खूबसूरत हो। वो तुम्हारी योग्यता की कद्र नहीं करता। तुम तो किसी राजा की रानी बनने के लायक हो। मेरे साम्राज्य और मेरे पहलू में तुम्हारा तहे-दिल से स्वागत है। उसे उन नारियों को भी खूब निशाना बनाना आता था, जो शारीरिक अतृप्ति, मानसिक तनाव और आर्थिक संकट से गुजर रही होती थीं। यदि उसकी मनचाही खूबसूरत नारी शरीर सौंपने में आनाकानी करती तो वह उसे दैवी प्रकोप का भय दिखाते हुए धमकाने से भी बाज नहीं आता था कि उसकी अलौकिक शक्तियां से उसके संपूर्ण परिवार का सत्यानाश हो जाएगा। भयभीत करके रख देने वाला उसका मानसिक दबाव कई औरतों को आत्मसमर्पण करने को विवश करता चला गया। उन्हें यह भी याद नहीं रहा कि यह सोशल मीडिया का जंगी दौर है। पलक झपकते ही बदनामी की काली पताका उनका सत्यानाश करके रख देगी। हुआ भी यही। अनेकों महिलाओं के साथ उसके अश्लील वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर छा गए। सोशल मीडिया के धुरंधरों को ऐसे सेक्स स्कैडलों का बेसब्री से इंतजार रहता है। उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बड़ी कू्ररता के साथ महिलाओं के चेहरे-मोहरे उजागर कर वे उनके वर्तमान और भविष्य का कबाड़ा कर रहे हैं। आस्था या मजबूरी के चलते बिस्तर की चादर बनने से पहले नारी को भी सौ बार सोचना चाहिए। कलमकार यह सोच-सोच कर भयभीत और चिंतित है कि शिकारी के हाथों लुटी महिलाएं अपने आसपास के लोगों तथा रिश्तेदारों को कैसे अपना मुंह दिखायेंगी। इन अति उत्साही भक्तिनों के बच्चे, माता-पिता और पति परमेश्वर समाज के निशाने और ताने सुनने को विवश होकर रह जाएंगे। बहुतों को पता ही नहीं होगा कि बीते वर्ष दिल्ली के एक विख्यात स्कूल की छात्रा का एक अश्लील अमर्यादित वीडियो वायरल हुआ था। बच्ची के पिता ने बेइंतहा बदनामी और शर्मिंदगी के चलते आत्महत्या कर ली थी...।
