अधिकांश नारियां शराब और शराबियों को नापसंद करती हैं। जिन घरों में पुरुष अत्याधिक शराब पीते हैं अनियंत्रित होकर कलह क्लेश करते हैं, बच्चों को मारते-पीटते हैं वहां के शोर-शराबे की आवाज बहुत दूर तक पहुंचती है। नशा कोई भी हो बरबादी का सबब बनता है। कई अच्छे-भले घर-परिवार इसकी वजह से टूटते देखे गये हैं। नशे के खिलाफ औरतें अपने-अपने तरीके से जंग लड़ती हैं। शहरों, गांवों में शराब आसानी से मिल जाती है। कॉलेजों, स्कूलों और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब की दुकानें तथा बीयर बार खुल जाते हैं। शासन और प्रशासन की लापरवाही और बेवकूफी का दंड बच्चों तथा महिलाओं को भोगना पड़ता है। सोचिए, उन महिलाओं पर क्या बीतती है जिन्हें अंधेरे में रखकर शराबियों से ब्याह दिया जाता है। जिनके पति अवैध शराब के धंधे में लिप्त होते हैं। सभी पत्नियां विरोध के स्वर बुलंद नहीं करतीं। चुपचाप नर्क भोगती रहती हैं। लेकिन अब जमाना बदल गया है। नारी जानती है कि यदि वह चाहे तो कुछ भी कर सकती है।
हरियाणा के फतेहाबाद में कुछ महिलाओं को शादी के बाद पता चला कि उनके पति और उनके संपूर्ण ससुराल वाले नशे के धंधे में लिप्त हैं। उन्होंने पहले तो उनसे सही राह अपनाने का अनुरोध किया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने घर ही छोड़ दिया। महिलाओं का कहना है कि वे मेहनत-मजदूरी कर घर चलाने की पक्षधर हैं। गरीबी से मुक्ति पाने के लिए नशा बेचने के कारोबार में सहभागी बन अपराधी नहीं बनना चाहती। रजनी नामक महिला ने बताया कि शादी से पहले उसे पता नहीं था कि उसका पति अवैध शराब बेचता है। इस चक्कर में कई बार जेल भी जा चुका है। उसने अपने पति से सुधरने की विनती की, लेकिन वह तो ईमानदारी से मेहनत कर कमाने और परिवार चलाने की बजाय अपराध करने का अभ्यस्त हो चुका था। वह उलटे उसे मारने-पीटने पर उतारू हो गया तो उसने पति और ससुराल वालों से हमेशा-हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। अनामिका की शादी को करीब सात-आठ महीने ही हुए थे। उसने देखा और जाना कि, पति अखंड शराबी है। उसका किसी और औरत से याराना है और दोनों मिलकर नशे का कारोबार करते हैं तो उसे बहुत तकलीफ हुई। अपने मां-बाप पर भी गुस्सा आया, जिन्होंने रिश्ता तय करने से पहले आंखें बंद रखीं और उसका भविष्य अंधकारमय कर दिया। पति ने उस पर दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया कि वह भी नशे के कारोबार में शामिल हो जाए। इससे इफरात कमाई होगी और जिन्दगी बड़े मज़े से कटेगी, लेकिन उसने एकदम मना कर दिया। घर भी छोड़ दिया। अब पति से अलग रहती है। तलाक का मामला कोर्ट में चल रहा है।
विदर्भ के चंद्रपुर जिले की सजग महिलाओं के दबाव के चलते भाजपा के जुझारू नेता ने शराबबंदी के आश्वासन को पूरा करने की पहल करते हुए शराबबंदी लागू करवा दी थी। लेकिन बाद में जैसे ही कांग्रेस की सरकार बनी तो शराब की दुकानें धड़ाधड़ खुल गईं। कांग्रेस के भ्रष्टाचारी बिकाऊ मंत्री का बयान आया कि जिले के अधिकतम लोग शराबबंदी के पक्ष में नहीं हैं। शराब के शौकीन पुरुष यही तो चाहते थे। मंत्री के लिए महिलाओं की कोई अहमियत नहीं थी। दरअसल उसे साम, दाम, दंड भेद से चुनाव जीतना आता है। जनहित के उसके लिए कोई मायने नहीं।
शराब ने न जाने कितने हंसते-खेलते परिवार तबाह किये हैं। एक आदमी की नशे की लत पूरे परिवार का सुख-चैन छीन लेती है। असंख्य महिलाओं को न चाहते हुए भी शराबी पतियों के साथ रो-रोकर जिन्दगी काटनी पड़ती है। नई दिल्ली की रहने वाली एक महिला ने शराबी पति से छुटकारा पाने के लिए जहर देकर उसे मार डाला। महिला का पति एक फाइनेंस कंपनी में मैनेजर था। वह रात को नशे में टुन्न होकर घर आता और उससे लड़ाई-झगड़ा करता। पड़ोसी भी तमाशा देखते और तरह-तरह की बातें करते थे। पति को सुधारने के लिए उसने कई उपाय किए, लेकिन बात नहीं बनी। वह पुलिस थाने भी गई, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। किसी के बताने पर एक तांत्रिक के पास गई जो नशेड़ियों का इलाज करने में सिद्धहस्त माना जाता था। तांत्रिक के तंत्र-मंत्र के बाद भी जब पति की पीने की आदत नहीं छूटी तो उसने तांत्रिक को ही कोसना शुरू कर दिया। शातिर तांत्रिक ने महिला को नशेडी पति से हमेशा-हमेशा के लिए मुक्ति पाने के लिए जहर पिलाकर खत्म करने की सलाह दी तो वह फौरन तैयार हो गई। तांत्रिक ने उसे जहरीला तरल पदार्थ लाकर दिया, जिसे उसने पति को पिला दिया। पति की मौत हो गयी। जब भेद खुला तो महिला और तांत्रिक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
अपने शराबी पिता के हाथों मां की पिटायी और अपशब्दों की बौछार से तंग आ गई थी एक बेटी। एक दिन की बात होती तो वह सब्र कर लेती। लेकिन पिता तो रोज शराब पीकर आता और उसकी मां और बहन के साथ अंधाधुंध मारपीट करता। सत्रह वर्षीय लड़की से मां और बहन की दुर्दशा देखी नहीं जाती थी। पिता की करतूतों की वजह से पूरे परिवार को हंसी का पात्र बनना पड़ रहा था। पढ़ी-लिखी शालिनी नामक इस लड़की ने आखिरकार पुलिस में शराबी पिता की शिकायत करने की ठानी। तीन-चार बार वह थाने गई, लेकिन खाकी वर्दी वालों ने उसकी समस्या जानने, सुलझाने के बजाय उसे चलता कर दिया। पुलिसवालों का रवैया देखकर शालिनी निराश तो हुई, लेकिन फिर भी अपना दुखड़ा सुनाने के लिए बार-बार पुलिस स्टेशन जाती रही। वहां उसे बस यही कहा जाता कि नशा करना कोई अपराध नहीं है। अधिकांश पति और पिता नशे में नियंत्रण खो देते हैं। सरकार ने ही जगह-जगह शराब की दुकानें खुलवा रखी हैं। यह सिर्फ देखने के लिए तो नहीं हैं। जिन्हें पीनी है वे पिएंगे ही। पीने के बाद मारपीट और गालीगलौज होना आम बात है। वह कैसी बेटी है, जो अपने पिता की शिकायत करने थाने आ जाती है। शहर में हजारों ऐसे शराबी हैं जो अपनी पत्नियों और बच्चों की पिटायी करते रहते हैं। तुम्हारी तरह उनकी बेटियां तो पिता के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराने के लिए नहीं चली आतीं!
शालिनी को तरह-तरह के उपदेश देकर पुलिसवाले विदा कर देते। शराबी पिता सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा था। वह दिन-रात उदासी और चिंता में डूबी सोचती-विचारती रहती। एक दिन उसके मन में एक नया विचार आया। पिता को सज़ा दिलाने के लिए उसने कोर्ट में छेड़छाड़ का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया। अदालत में जब मामले की सुनवाई हुई तो उसने जज को बताया कि उसने यौन उत्पीड़न का झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। उसने पिता के खिलाफ जज को झूठा मुकदमा दर्ज कराने के पीछे की वजह बताई कि किस तरह से वह अपने शराबी पिता के आतंक से तंग आकर थाने में शिकायत दर्ज करवाने के लिए गयी, लेकिन उसकी एक भी नहीं सुनी गई। अदालत ने लड़की के साहस की प्रशंसा की और पिता को यौन उत्पीड़न के आरोप से तो बरी कर दिया, लेकिन पत्नी और बेटी पर नशे में गालीगलौज और मारपीट करने के आरोप में दोषी ठहराया। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि, अपनी मां की दुर्दशा देखकर बेटी ने जो रास्ता अख्तियार किया वो उसकी मजबूरी थी। नशे में गर्क हो चुके पिताओं का जानवरों से भी बदतर हो जाना हर संस्कारवान बेटी-बहन-पत्नी के खून को खौलाता है।
महानगर में एक 11 वर्षीय छठवीं में पढ़ने वाली छात्रा को उसी के नशेड़ी पिता ने अपनी अंधी वासना का लगातार शिकार बनाया। विरोध करने पर उसकी मां की हत्या करने की धमकी देता रहा। शराब और गांजे के नशे के गुलाम बाप से डरी सहमी रहने वाली बालिका ने आखिरकार अपने साथ हो रहे दुष्कर्म की जानकारी अपनी पड़ोसी महिला को दे दी। महिला बाप की हैवानियत के बारे में जानकर सन्न और स्तब्ध रह गई। ऐसी बातों को फैलने में देरी नहीं लगती। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं तक जब यह बात पहुंची तो उन्होंने दुष्कर्मी को सबक सिखाने की ठानी। बलात्कारी हैवान को इसकी भनक लग गयी। वह घर से भाग गया। फिर बात पुलिस तक भी जा पहुंची। पुलिस खोजबीन कर बस्ती में छिपे नराधम को दबोचकर थाने में ले आयी। बालिका की मां को भी अपने पति की गिरफ्तारी के बाद बेटी के साथ होते चले आ रहे घिनौने कृत्य का पता चला। उसने थाने के अंदर पति की चप्पलों से ऐसी धुनायी की, कि लोग देखते रह गये। गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व बेटी ने इशारों-इशारों में मां को पिता की करतूत के बारे में अवगत कराने की कोशिश की थी, लेकिन मां ने नजरअंदाज कर दिया था। दरअसल, मां ने कभी कल्पना ही नहीं की थी कि कोई बाप इस हद तक नीचे गिर सकता है। हां, उसे यह जरूर पता था कि उसका पति शराब और गांजे के नशे में मदहोश रहता है।
अपने देश के कई परिवारों में पुरुषों की नशाखोरी और दरिंदगी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया जाता। उनकी दुराचारी प्रवृत्ति पर भी यह सोचकर परदा डाला जाता है कि भेद खुलने पर पूरे परिवार की बदनामी होगी। लोग जीना हाराम कर देंगे। कुछ दिन पूर्व सोशल मीडिया पर वायरल होते वीडियो पर निगाहें जा अटकीं। एक मासूम बेटी घर की दीवार पर लगी दिवंगत पिता की तस्वीर के सामने खड़ी होकर कहती दिखायी दी,‘‘मम्मी आपको मना करते-करते थक गई कि शराब पीना बंद करो फिर भी आप ने पीनी नहीं छोड़ी। मेरी भी चिंता नहीं की। सबको अकेला छोड़कर चल दिए। आपको क्या पता कि आपके ऐसे चल देने से मुझे कितना दु:ख होता है। सबके पापा हैं। मेरी सभी सहेलियां पापा के साथ रहती हैं उनसे ढेर सारी बातें करती हैं। लेकिन मेरी सुनने वाला कोई नहीं है...’’ इस वीडियो को जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं। जागरुक और संवेदनशील लोगों के दिल-दिमाग पर असर करते इस वीडियो का शराब के अखंड शौकीन पिताओं पर कुछ तो असर पड़े यही हम चाहते हैं...।

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