Thursday, July 2, 2026

छल, कपट, बेवफाई की खाई

 झारखंड के बोकारो जिले में एक सत्रह वर्षीय लड़की फिल्मी अंदाज में 100 फुट ऊंचे मोबाइल टॉवर पर चढ़ गई। लड़की की जिद थी कि वह तब तक नीचे नहीं उतरेगी, जब तक उसके प्रेमी को जेल से रिहा नहीं किया जायेगा। लड़की का रांची के एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। वह उसी से शादी करना चाहती थी, लेकिन उसके मां-बाप तैयार नहीं थे। उन्होंने उसके प्रेमी के खिलाफ अपहरण की झूठी शिकायत दर्ज करवा दी। कर्तव्यपरायण भारतीय पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया। अदालत ने प्रेमी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। प्रेमिका को यह नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं हुई और उसने प्रेमी को छुड़वाने के लिए मोबाइल टॉवर का सहारा लिया। कई घंटों तक वह इस मांग के साथ वहीं डटी रही।  एहतियातन टॉवर के चारों ओर नेट बिछाया गया। सभी चिंतित और भयभीत थे कि वह कहीं कूदकर अपनी जान न दे दे। उसे मनाने, समझाने और नीचे लाने में पुलिस को कई घंटे लग गए। छत्तीसगढ़ के शहर जांजगीर में विवाह समारोह के दौरान दूल्हे को नशे में धुत देखकर दुल्हन ने शादी करने से सरासर इंकार कर दिया। मुस्कान नामक इस लड़की ने सगाई के समय भी लड़के को जब नशे में टुन्न देखा था तब उसका माथा घूम गया था। तब उसने उसे जीभर कर डांटा-फटकारा था। लड़के के कान पकड़ने पर ही वह शादी के लिए मानी थी। लेकिन जब उसने गौर किया विवाह की रस्मों के दौरान वह ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा है। नशे में बहकी-बहकी बातें कर रहा है तो उसने नशेड़ी के साथ सात फेरे लेने से स्पष्ट मना कर दिया। मुस्कान के इस साहसिक निर्णय का सभी ने स्वागत किया। जिला पुलिस अधीक्षक तथा विभिन्न समाजसेवकों की उपस्थिति में उसे पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। वो जमाना बहुत पीछे छूट चुका, जब कोई भावुक कवि नारी को अबला बताता था तो पाठक कवि की नारी के प्रति सहानुभूति में रची-बसी सोच की सराहना करते थे। उसे नारी का हितकारी घोषित कर हार, गुलदस्तों और शालों से सम्मानित करते थे। आज नारी, पुरुषों को कड़ी टक्कर देते हुए नया इतिहास लिखने, रचने की ओर तेजी से अग्रसर है। शिक्षा, खेलकूद, ज्ञान-विज्ञान, समाज सेवा, राजनीति आदि तमाम क्षेत्रों में झंडे गाड़ती नारियों की  प्रेरक उपलब्धियों की प्रभावी खबरें हर सजग भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देती हैं।

ऐसा कोई भी देशवासी नहीं जो नारी को शिखर पर देखना नहीं चाहता हो। लेकिन बीते कुछ वर्षों से कुछ नारियों के द्वारा संगीन अपराध करने के मामले में पुरुषों की बराबरी करने की खबरों ने चिंतकों को गहन चिंता में डाल दिया है। क्रिमिनल लड़की है या लड़का इसमें किसी का पक्ष लेने और सहानुभूति दर्शाने की कोई गुंजाइश नहीं है। बेवफाई तो अपनी जगह है लेकिन कुंआरी और शादीशुदा युवतियां जिस तरह से नृशंस हत्याएं करते हुए मीडिया में छा रही हैं, उससे यह सवाल तो सताता ही है कि क्या उन्हें कानून का भय और जानकारी नहीं? जेलों में जिस तरह से महिलाओं की संख्या बढ़ रही है उससे तो यही लगता है कि अपराध करने को आतुर नारियों ने अवैध रिश्तों तथा भोग विलास को ही अपने जीवन का असली मकसद मान लिया है। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि माता-पिता पर क्या गुजरती है और समाज कैसे-कैसे उनके छल, कपट और गिरेपन पर थूकता है। अपने करीब देखने के लायक ही नहीं समझता। एक हकीकत यह भी है कि बिगड़ी और भटकी शहजादियां इस भरोसे और भ्रम में संगीन अपराधी बन रही हैं कि उनके रईस मां-बाप किसी न किसी तरह से उन्हें बचा ही लेंगे। पैसे से तो सब कुछ खरीदा जा सकता है। यहां तक कि शासन और प्रशासन की बागड़ोर संभाले ऊंचे लोगों का ईमान धर्म भी। उनके लिए यह भी बचकानी सोच है कि सच्चा प्यार ईश्वर की पूजा है। स्वार्थ और बेवफाई का अंजाम कभी भी सुखद नहीं होता। अपने आशिक के लिए पति और मंगेतर को मौत के घाट उतार देने की क्रूर घटनाएं रिश्तों को ही कलंकित नहीं करतीं, मानवता को भी झकझोर देती हैं। 

बीते हफ्ते महाराष्ट्र के पुणे में एक लड़की ने अपने होनेवाले पति को प्रेमी के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया। इतना ही नहीं उसने नृशंस हत्या को एक हादसे का रूप देने की खौफनाक साजिश रचते हुए प्यार में अंधी, बेवफा युवतियों और पत्नियों की अपराध कुख्यात चर्चित। डायरी के पन्ने खोल दिए। जिनका खबरों से अटूट नाता है, उनके लिए तो राजा रघुवंशी हत्याकांड को भूला पाना बहुत मुश्किल है। हनीमून पर ही खून की होली की कल्पना कौन कर सकता है? इंदौर की पच्चीस वर्षीय सोनम की 11 मई 2025 को राजा रघुवंशी से बड़ी धूमधाम से शादी हुई थी। शादी के एक महीने के बाद दोनों हनीमून के लिए शिलांग जा पहुंचे। सोनम ने राजा रघुवंशी से ब्याह तो कर लिया था, लेकिन उसका पूर्व प्रेमी राज कुशवाह अभी भी उसके तन-मन में बसा था। सात फेरे लेने के पश्चात भी वह रघुवंशी को अपना पति स्वीकार नहीं कर पायी थी। प्रेमी के प्यार में अंधी हुई सोनम के लिए हनीमून तो महज दिखावा था। उसने पहले से ही अपने पति को यमलोक पहुंचाने की योजना बना ली थी। इस षडयंत्र में साथी था प्रेमी राज कुशवाह। दोनों ने मिलकर योजना बनाई। तीन कॉन्ट्रेक्ट किलर को अच्छी-खासी फीस देकर शिलांग बुलवाया और हनीमून के दौरान पति राजा रघुवंशी की धारधार हथियारों से हत्या करवाने के पश्चात गहरी खाई में फेंक दिया। उसके पश्चात सोनम ने पुलिस के समक्ष लूटपाट का नाटक किया। इतना ही नहीं खुद के बेहोश होने की झूठी कहानी भी गढ़ी। राजा के शरीर पर हथियारों की मार के गहरे घाव थे, जबकि सोनम को नाममात्र की खरोंच तक नहीं आई थी। सलाखों के पीछे पहुंचने के पश्चात सोनम के पास पछतावे के सिवा और कोई चारा नहीं था।

मध्यप्रदेश के धार जिले में 2026 के अप्रैल महीने में 28 वर्षीय पुरोहित देवकृष्ण की उसके घर में ही हत्या कर दी गई। यहां भी हत्यारी थी उसकी पत्नी प्रियंका, जिसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति को इसलिए  मार डाला, क्योंकि उसके शरीर का रंग काला था और उसके अनुसार उसके लायक भी नहीं था। हत्या के बाद प्रियंका ने पुलिस को बताया कि लुटेरों ने घर में घुसकर लूटपाट की और मेरे जीवनसाथी का खात्मा कर दिया। लेकिन सच्चाई सामने आने में ज्यादा समय नहीं लगा। रिश्तेदारों तथा जान पहचान के लोगों से पता चला कि हत्यारी अपने पति को काला-कलूटा और नाकाबिल कहकर  अपमानित करती रहती थी। वर्ष 2017 में तेलंगाना में स्वाति नामक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति को बेहोशी का इंजेक्शन देकर मार डाला। इतना ही नहीं उसका नामो निशान खत्म करने के लिए शव को जंगल में जला दिया। बात यहीं खत्म नहीं हुई। बिल्कुल फिल्मी तौर-तरीके के साथ उसने अपने प्रेमी के चेहरे पर एसिड डाला और ससुराल वालों को बताया कि अज्ञात लोगों ने उसके पति सुधाकर पर एसिड अटैक किया है। दरअसल, हत्यारी पत्नी अपने प्रेमी राजेश की प्लास्टिक सर्जरी करवाकर उसे हमेशा-हमेशा के लिए पति सुधाकर की पहचान देने की तैयारी में थी। लेकिन अस्पताल में जब नकली सुधाकर (राजेश) को मटन सूप परोसा गया तो उसने लेने से इसलिए मना कर दिया, क्योंकि वह शुद्ध शाकाहारी था, जबकि सुधाकर (पति) मांसाहारी था। इसी वजह से ससुरालवालों को शक हुआ और हैरतअंगेज और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हो गया। बिरयानी में नींद की गोलियां डालकर पति का हमेशा-हमेशा के लिए अंत, कत्ल करने के बाद नीले और पीले ड्रम में पति की लाश छिपाने दबाने की खबरों को भी भूला पाना आसान तो नहीं। यह खौफनाक हिंसक सिलसिला कब और कहां जाकर थमेगा, इसका उत्तर फिलहाल नदारद है। 

18 जून 2026 के दिन रियल एस्टेट कंपनी के मालिक केतन अग्रवाल को उसकी मंगेतर सिया गोयल ने पुणे के निकट स्थित विख्यात लोहगढ़ किले  की पहाड़ियों पर भ्रमण के बहाने से ले जाकर खाई में धकेलकर जो दर्दनाक मौत दी उससे उसने भी कुख्यात हत्यारियोेंं में अपना नाम शामिल करवा लिया। इस शातिर लड़की का अखबारों तथा सोशल मीडिया से कुछ न कुछ तो वास्ता रहा होगा, जिनमें वासना में अंधी हुई बेवफा, बेवकूफ नारियों की खबरे सुर्खियां बन सभी को सावधान करती रहती हैं। फिर भी उसने अंधापन नहीं छोड़ा! बीस वर्षीय सिया की भले ही केतन से बड़ी धूमधाम से सगाई हो चुकी थी लेकिन अभी भी उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी से मिलना-जुलना नहीं छोड़ा था। सिया को अपना प्रेमी, अपने मंगेतर से कहीं ज्यादा भाता था। सांवले रंग के केतन के बाल झड़ चुके थे और वह विग लगाता था। बोलते समय हकलाता भी था, जो सिया को नापसंद था। वह मंगेतर केतन से हमेशा-हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहती थी। इसलिए उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर केतन के खात्मे की साजिश रची और घूमने के बहाने लोहगढ़ किले पर ले गई। उसके पीछे-पीछे प्रेमी चेतन भी जा पहुंचा और मौका मिलते ही दोनों ने केतन को 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर अंधा विश्वास करने की दर्दनाक सौगात दे दी। केतन सिया से बेइंतहा प्यार करता था। इश्क के नशे में वह इतना अंधा हो चुका था कि वह उसकी साजिशों को नजरअंदाज करता गया। विवाह तो अभी होने को था, लेकिन सिया ने शॉपिंग के नाम पर उससे 1 करोड़ रुपए झटक कर अपने प्रेमी चेतन को सौंप दिए, ताकि वह अपनी हैसियत सुधार सके। दोनों ने तीन साल बाद शादी करने की योजना बना रखी थी। उससे पहले दोनों चेतन से अधिक से अधिक धन ऐंठने में लगे थे। दोनों पार्टी बाजी और नशे के शौकीन थे। पुलिस लॉकअप में भी सिया ने बीयर की मांग की। केतन अग्रवाल की मौत के बाद हत्यारी सिया के माता-पिता को भी गहरा सदमा लगा। उसके पिता को तो हार्टअटैक आ गया और अस्पताल में भर्ती किया गया। बीमार पिता ने यह भी कहा कि ‘बेटी को फांसी दे दी जाए। मुझे कोई गम नहीं होगा। अपने जवान बेटे को खोने वाले पिता को फूट-फूटकर रोते देख सभी की आंखें भर आईं। हर कोई यही कहता नजर आया कि धोखेबाज कपटी, फरेबी सिया को भरे चौराहे पर फांसी दे दी जानी चाहिए। वह अब इस दुनिया में रहने लायक नहीं हैं...

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